सड़क की सजावट मौलश्री


मौलश्री का पौधा सड़क किनारे मन को अपने आप आकर्षित कर लेती है  | इसके चमकीले हरे पत्ते, पेड़ की सुन्दर बनावट अत्यंत सुन्दर लगती है, मौलश्री के सुगन्धित सफ़ेद फूल जिसकी भीनी – भीनी  सुगंध  हवाओं को महका देती है, इसके सफ़ेद पुष्प की हम मालाएं भी बना सकते हैं,
मौलश्री  को अनेक भागों में अलग अलग नामों  से  भी जाना जाता है जैसे  -
Indian Medlar, Bulletwood tree, Bakul or Maulsari आदि .
इस वृक्ष को राजमार्ग के किनारे, बगीचे के किनारे अधिकतर लगाया जाता है, क्योंकि इसके वृक्ष का आकर तथा बनावट भी बहुत खास होता हैं, यह छतरीनुमा तथा गोलाकार होता है जो इस वृक्ष को विशिष्ट बनाता है इसे हम मंदिरों में भी बहुत देख सकते है , क्योंकि  एक मान्यता है जो भी मनुष्य सड़क के किनारे 2 या 2 से अधिक मौलश्री के वृक्षों का रोपण एवं पालन करता है. वह एक सौ यज्ञों को करने का पुण्य प्राप्त करता है.  , इसका पुष्प छोटे – छोटे सफ़ेद होते हैं, जो रात को झड़ कर सुबह  फूलों की कालीन जैसे दिखता है . मौलश्री  के वृक्ष ज्यादा लम्बे नहीं होते , अधिक से अधिक 12 या 18 मीटर की उचाई वाला पेड़ होता है .यह पेड़ सदाबहार  ,चमकदार पत्तों और घना छायादार होता है .ग्रीष्म में  इसके नीचे एक सुकून मिलती है , तथा इसके छोटे फूल वातावरण को अपनी मीठी सुगंध से भर देती है .इसके फल छोटे – छोटे जामुन से छोटा आकर के होते  है, जो पकने पर नारंगी तथा कच्चे में हरे रंग के होते हैं |
यह एक औषधि पादप भी है ,जिसका  उपयोग आयुर्वेद में सदियों से होता आ रहा है .मुख्य रूप से यह दंत चिकस्ता में किया जाता है , दातों से सम्बन्धित कोई सा भी बीमारी ,मसूड़ों से खून बहना ,ढीला दांत ,कीटाणु आदि में इसके विभिन्न भागों का यूज़ करतें है . मौलश्री का कुल सैपोटेसी तथा वैज्ञानिक नाम माइमोसोप्स एंजेली ’’ है, यह वृक्ष पुरे भारतवर्ष में पाया जाता है. मौलश्री के पौधे को हम बोनसाई के रूप में भी यूज़ कर सकते है .

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