करोंदा / करौंदा



करोंदा का पौधा नीबू के पौधे जैसे झाड़ीनुमा होता है .इसका झाड़ी लगभग 6 से 7 फीट उचा तक होता है ,इसका पत्ता नीबू के पत्ते से छोटा होता है .इसके झाड़ी में कांटे होते इसलिए इसका उपयोग हम अपने बगीचे मैं हेज के रूप में ,अपने बगीचे को घेराव के लिए करते हैं , वैसे हम करौदे का फल का उपयोग करते हैं ,इसका फल बहुत ही सुन्दर और खट्टा होता है , जिसे हम अचार ,चटनी ,मुरब्बा आदि बनाने में  use करते हैं .

करौंदा का उपयोग हम आयुर्वेद मैं भी करते हैं इसके  बहुत सारी दवाइयाँ हम बना सकते हैं .करौंदे का वैज्ञानिक नाम कैरिसा कैरेंड्स ( Corissa Corandars )  हैं .

करौंदे का उपयोग हम आज अपने रसोई  मैं खादय पदार्थ के रूप मैं बहुत ज्यादा  करते हैं . इसलिए यह अब कृषि के लिए भी उपयोगी फसल का रूप धारण कर चुकी हैं .



















करौंदा का फसल भारत मैं मध्यप्रदेश ,राजस्थान ,गुजरात ,उत्तरप्रदेश ,आदि  जगहों पर बड़ी आसानी से किया जा रहा है .और अच्छी आमदनी भी मिल रही हैं .क्योकि यही जीरो  बजट फसल हैं ,एक बार पोधे लगाने के बाद 1/5 से 2 साल बाद फल देनी स्टार्ट कर देती हैं , इसका फल छोटे और गोल होता हैं जब कच्ची अवस्था मैं होता हैं तो हरे और सफेद या गुलाबी और बैगनी रंग की हाती हैं . पकने पर करौंदे का फल काली रंग की हो जाती हैं ,जिससे हम छोटे –छोटे बीज प्राप्त कर सकते हैं ,करौंदे का प्रसारण हम बीजों तथा कलम के द्वारा प्राप्त कर सकते हैं . करौंदे के फल से हम बिटामिन सी  भरपूर मात्रा में   पा सकते हैं . इसके फूल को काटने पर सफेद दूध निकलता हैं .

Comments