कचनार की कली (kachnar ) ,गार्डनिंग टिप्स इन हिंदी


gardening tips in hindi
फूलों से लदा एक वृक्ष कचनार जब यह अपने फूलों से पूर्ण रूप से लदी होती , बहुत ही आकर्षित लगती हैं , रोड  किनारे जब हम गुजरते रहते हैं , तो यह हमारे मन को बरबस ही आकर्षित  कर लेती हैं ,कचनार फूलों से लदा एक वृक्ष हैं , साथ ही साथ यह auषधिय गुणों से भरपूर एक वृक्ष हैं |




वैसे तो भारत मैं यह सभी स्थानों  पे पाया जाता हैं ,लेकिन मध्य भारत मैं इसकी खासी उपयोगिता हैं , यहां के आदिवासी इसके कोमल पत्तों से स्वादिष्ट सब्जी बनाते हैं ,इसके आलावा इसके कली से भी सब्जी बनाई जाती हैं |
कचनार की पुष्प दिसबर से लेकर अप्रेल माह तक अपना छठा बिखरता हैं ,यह कई रगों में पाया जाता हैं जैसे गुलाबी ,सफ़ेद ,सफ़ेद और गुलाबी का मिक्स ,और बैंगनी रगों में इसके पुष्प बहुत ही आकर्षक  लगते हैं |


कचनार की कई वैरायटी मिलती हैं , जिसमे से हम ,अधिक पुष्प देने वाली प्रजाति को अपने गार्डन मैं  अवश्य स्थान देते हैं , इसके अलावा रोड किनारे और  अलंकृत बगीचों में हम कचनार की खासी उपयोग करते हैं .कचनार  की उपयोग से हम आस पास  खूबसुरती में चार ‘चाँद लगा सकते हैं |



कचनार की फल चपटे और लम्बे होते हैं , हम कचनार की प्रसारण  बीज द्वारा करते हैं , इसके बीज को बरसात में लगाया जाता हैं जो कि इसकी तीव्र गति से विकास के कारण  दो साल में ही हमें फूल देनी शुरू कर देती  हैं | 



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